धान की प्रजातियों के नाम एवं उनकी की बुवाई व कटाई के आधार पर वर्गीकरण

धान की प्रजातियों के नाम एवं उनकी की बुवाई व कटाई के आधार पर वर्गीकरण - धान अनाज फसल में एक महत्वपूर्ण फसल है, जिसकी विश्व के लगभग सभी देशों में धान की खेती (dhaan ki kheti) की जाती है ।

भारत में भी धान एक मुख्य खद्यान फसल है, जो सभी राज्यों में मुख्य आहार के रूप में खाया जाता है ।

भारत में विभिन्न स्थितियों में धान की खेती (dhaan ki kheti) की जाती है इसीलिए वहां के अनुकूल वातावरण एवं खेती की प्रणाली (kheti ki prnali) के अनुसार उन्नत जाति का चुनाव करना अति आवश्यक होता है ।


भारत में बोई जाने वाली धान की जातियों का वर्गीकरण

भारत में विभिन्न स्थितियों में बोई जाने वाली धान की किस्में (dhaan ki kisme) की बुवाई एवं कटाई का समय भिन्न होता है ।


भारत में बोई जाने वाली कुछ प्रमुख जातियों को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है -

  • ऊँची भूमि वाले क्षेत्रों में बोई जाने वाली धान की किस्में
  • निचली या वर्षा आधारित क्षेत्रों में बोई जाने वाली धान की किस्में
  • सीधी बुवाई के लिए बोई जाने वाली धान की किस्में
  • रोपाई की जाने वाली धान की किस्में
  • पकने की अवधि के आधार पर बोई जाने वाली धान की किस्में
  • कीट व बीमारी रोधी बोई जाने वाली धान की किस्में
  • सूखा रोधी वाले क्षेत्रों में बोई जाने वाली धान की किस्में
  • जल रोधी के आधार पर बोई जाने वाली धान की किस्में
  • लवण व क्षार रोधी के आधार पर बोई जाने वाली धान की किस्में


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धान की प्रजातियों के नाम


विभिन्न स्थितियों में उगाई जाने वाली धान की प्रजातियां निम्नलिखित है -

धान की प्रजातियों के नाम एवं उनकी बुवाई व कटाई के आधार पर उनका वर्गीकरण, भारत में बोई जाने वाली धान की जातियों का वर्गीकरण, धान की प्रजातियों के नाम,
धान की प्रजातियों के नाम एवं उनकी की बुवाई व कटाई के आधार पर वर्गीकरण


धान की किस्में | dhaan ki kisme


( 1 ) ऊँची भूमियों के लिये धान की किस्में

सामान्यतः किसान ऊँची भूमियों में लम्बी बढ़ने वाली जातियों की बुवाई करते है, इन किस्मों की उपज कम होती है ।

ऊँची भूमियों में बोई जाने वाली किस्में अपना जीवनकाल 70-100 दिनों में पूरा करती है ।

इनकी जड़ें भूमि में गहरी जाती है, ये जातियाँ कम पानी चाहने वाली होती हैं ।

इन जातियों की क्षमता जल्दी पकने की होती है ।

इन जातियों पर विभिन्न रोगों का प्रकोप भी कम होता है ।


इस वर्ग की प्रमुख किस्में -

  • वन्दना
  • स्नेहा
  • पूर्वा
  • सातन
  • वनप्रभा
  • सुभद्रा
  • त्रिपति
  • तारा
  • हीरा
  • कल्याणी- II
  • कलिंग- II
  • अन्नपूर्णा
  • पथरा
  • प्रभात
  • केसरी
  • सुफाला
  • नरेन्द्र -1
  • किरण
  • शंकर
  • रूद्र व आभा आदि है ।


( 2 ) वर्षा आधारित नीची भूमियों के लिये धान की किस्में

ऐसे क्षेत्र जहाँ पर जलवायु की अनिश्चितता बनी रहती है उगने वाली जातियों में सूखा, बाढ़, अम्लता, ठण्ड आदि को सहन करने की क्षमता बढ़ जाती है ।


इस वर्ग की प्रमुख किस्में -

  • महसुरी
  • मधुरी
  • सवर्ण
  • रणजीत
  • कुशल
  • राधा
  • सुगन्ध
  • जयश्री
  • निरजा
  • पंकज
  • जौगन
  • सावित्रि
  • रामकृष्ण
  • महालक्ष्मी
  • आदित्य
  • धरती
  • रंगीली
  • वैदेही
  • सुधा
  • बीराज
  • अमूल्य
  • दिनेश
  • तुलसी
  • मनोहरसाली
  • मधुकर
  • जलप्रिय
  • जलमग्न व जलनिधि आदि है ।


( 3 ) उत्तर प्रदेश के लिये धान की किस्में

उत्तर प्रदेश में उगाई जाने वाली धान की संस्तुत किस्में बुवाई व रोपाई के आधार पर निम्न दो वर्गों में विभाजित की जाती है ।


( i ) सीधी बुवाई वाली धान की किस्में -

  • साकेत - 4
  • कावेरी
  • बाला
  • नगीना - 221 आदि ।


( ii ) रोपाई की जाने वाली धान की किस्में -

  • प्रसाद
  • बी. एल - 8
  • साकेत - 8
  • रत्ना
  • साकेत - 4
  • I.R. -  8
  • L.R. - 20
  • साकेत - 5
  • Type - 9
  • Type - 23
  • Type - 100
  • जया
  • IR24
  • सरजू - 49 तथा सरजू -50 आदि ।


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पकने की अवधि के आधार पर उत्तर प्रदेश के लिये संस्तुत की गई जातियाँ निम्न प्रकार है -


( i ) कम अवधि में पकने वाली धान की किस्में -

ये किस्में अपना कार्यकाल 90 से 110 दिन में पूरा करती है ।


उदाहरण -

  • बाला
  • कावेरी
  • पूसा - 2-21
  • सरजू -49
  • सरजू -50
  • Type - 43 व नगीना -22 आदि ।


( ii ) मध्यम अवधि में पकने वाली धान की किस्में -

ये किस्में अपना कार्यकाल 111 से 130 दिनों में पूरा करती हैं ।


उदाहरण -

  • जया
  • I.R. - 20
  • साकेत -5
  • चकिया -59 (कम गहरे पानी के लिये)
  • मधुकर (अधिक गहरे पानी के लिये)
  • Type - 3 व Type - 21 आदि ।


( ii ) अधिक समय में पकने वाली धान की किस्में -

ये जातियाँ बुवाई से कटाई तक 130 दिन से अधिक समय लेती है ।


उदाहरण -

  • Type - 9
  • Type - 23
  • Type - 26
  • जलमग्न (4.5 मीटर तक उगने की क्षमता) व जयसूर्या (2.4 मीटर तक उगने की क्षमता) ।


( 4 ) कीट व बीमारी रोधी किस्में


कीटरोधी धान की किस्में -

  • सुरक्षा
  • सुरेखा
  • रूचि
  • अभय
  • साथी
  • गौरी
  • शक्तिमान व ललाट आदि ।


रोगरोधी धान की किस्में -

  • तुलसी
  • I.R. - 64
  • अजय व PR. - 10 आदि ।


( 5 ) सूखा रोधी धान की किस्में

  • बाला
  • किरण
  • CO - 31
  • चौधरी -45
  • CRM - 13, 32 एवं 41 आदि ।


( 6 ) जलरोधी धान की किस्में

  • पंकज
  • महसूरी
  • जगन्नाथ
  • गौतमी
  • वशिष्ठ व CR - 1014 आदि ।


( 7 ) लवण व क्षार रोधी धान की किस्में

  • विकास
  • CSR - 5 व CSR - 10 आदि । 

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