धान की सीधी बुवाई के लाभ एवं धान की सीधी बुवाई में खरपतवार नियंत्रण

वर्तमान समय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल व उत्तर पश्चिम भारत में धान उत्पादन की एक अनूठी एवं लाभकारी तकनीक धान की सीधी बुवाई (dhan ki sidhi buwai) विकसित की गई है ।

इस तकनीक को अपनाने से धान की फसल के उत्पादन पर होने वाला खर्च कम हो जाता है ।

सस्य वैज्ञानिकों का मत है, कि रोपण विधि से धान उगाने की तुलना में खेत की इसकी सीधी बुवाई (sidhi buwai) करने पर कई प्रकार से लाभ होता है ।


धान की सीधी बुवाई के लाभ एवं धान की सीधी बुवाई में खरपतवार

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धान की सीधी बुवाई में खरपतवार नियंत्रण

इस नई तकनीक को अपनाने में एक प्रमुख समस्या यह है कि खेत में खरपतवारों की संक्रमणता (weed infestation) बढ़ जाती है ।


खरपतवारों के संक्रमण पर नियन्त्रण के लिये -

पेन्डीमैथालिन (Pendimethalin) खरपतवारनाशी का प्रयोग 1.25 लीटर/हैक्टेयर की दर से करने पर खरपतवारों से छुटकारा मिल जाता है ।

इस रसायन का प्रयोग बुवाई के तुरन्त बाद करना चाहिये ।


धान की सीधी बुवाई कब एवं कैसे की जाती है?


रोपण विधि से धान उगाने में सर्वप्रथम धान की पौध नर्सरी में तैयार की जाती है और खेत में पानी भरकर जुताई कर खेत को लेहयुक्त (Puddled) बनाने में अधिक परिश्रम की आवश्यकता होती है ।

ऐसा करने से भूमि की जल धारण करने की क्षमता बढ़ जाती है, परन्तु आजकल मजदूरों के उपलब्ध न होने के कारण उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता इस प्रणाली में धान की खेत में सीधी बुवाई जून के प्रथम सप्ताह में नर्सरी की तैयारी के समय ही की जाती है ।

यदि बुवाई के समय भूमि में नमी की कमी है तो पहले एक हल्की - सी सिंचाई करनी चाहिये ।

बीजों की बुवाई पंक्तियों में 20 सेमी. की दूरी पर की जाती है ।

बुवाई की गहराई 3 सेमी० रखी जानी चाहिये ।

सीधी बुवाई (sidhi buwai) वाली फसल में 120-150 किग्रा. नाइट्रोजन प्रति हैक्टेयर व फास्फोरस तथा पोटाश की मात्रा भूमि परीक्षण के आधार पर दी जानी चाहिये ।


धान की सीधी बुवाई के क्या लाभ है?


रोपण विधि की तुलना में धान की सीधी खेत में बुवाई करने से होने वाले निम्न प्रकार है -

  • धान की सीधी बुवाई (dhan ki sidhi buwai) करने से उपज में वृद्धि होती है, परन्तु खरपतवारों पर नियन्त्रण के लिये पैण्डीमैथालीन 1.25 लीटर/हैक्टेयर की दर से 700 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रयोग करना बहुत ही आवश्यक है ।
  • रोपण विधि की तुलना में धान की खेती कम खर्च के साथ की जा सकती है ।
  • इस विधि से धान उगाने से मजदूरों पर निर्भरता कम हो जाती है । रोपण विधि की तुलना में एक तिहाई श्रम की बचत होती है ।
  • रोपण विधि में धान की कुल जलमाँग का लगभग 20% जल रोपाई के समय खर्च हो जाता है जबकि इस विधि में इस जल की बचत होती है ।
  • इस विधि में कम समय में अधिक क्षेत्रफल की बुवाई की जा सकती है ।

अतः उचित समय पर या कम समय में सीधी बुवाई (sidhi buwai) का कार्य किया जा सकता है ।

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