दूबघास, बथुआ, मौथा इत्यादि खरपतवारों के वैज्ञानिक नाम, वृद्धि एवं नियंत्रण की विधियां

दूबघास, बथुआ, मौथा, गाजरघास एवं कांस जैसे खरपतवार प्राय: आज के समय में लगभग सभी फसलों में अत्याधिक देखने में मिलते है ।

आज हम दूबघास, बथुआ, मौथा, गाजरघास एवं कांस जैसे खरपतवारों के सामान्य/प्रचलित नाम, वैज्ञानिक नाम, वृद्धि का स्वभाव, प्रसारण, आर्थिक महत्व एवं नियंत्रण की विधियों के बारे में जानेंगे ।


प्रमुख खरपतवारों के वैज्ञानिक नाम, वृद्धि एवं नियंत्रण की विधियां लिखिए? | names of weeds and their control

बथुआ, मौथा, गाजरघास एवं कांस जैसे खरपतवारों के सामान्य/प्रचलित नाम, वैज्ञानिक नाम, वृद्धि का स्वभाव, प्रसारण, आर्थिक महत्व एवं नियंत्रण की विधियां
दूबघास, बथुआ, मौथा इत्यादि खरपतवारों के वैज्ञानिक नाम, वृद्धि एवं नियंत्रण की विधियां

दूबघास, बथुआ, मौथा, गाजरघास एवं कांस खरपतवारों का निम्न  के अंतर्गत वर्णन कीजिए -

  • सामान्य/प्रचलित नाम ( Common Name )
  • वैज्ञानिक नाम ( Scientific Name )
  • वृद्धि का स्वभाव ( Nature Of Growth )
  • प्रसारण ( Broadcasting )
  • आर्थिक महत्व ( Economic Importance )
  • नियंत्रण की विधियां ( Method Of Control )


निम्न खरपतवारों का वर्णन कीजिए?

  • दूबघास ( Burmuda Grass )
  • बथुआ ( Dog's Tooth Grass )
  • मौथा ( Nut Grass )
  • गाजरघास ( Congress Grass )
  • कांस ( Tigergrass )


1. दूबघास ( Burmuda Grass )


सामान्य नाम ( Local Name ) -

दूबघास, हरियाली, हरी दूब ।


वैज्ञानिक नाम ( Scientific Name ) -

Cynodon dactylon


कुल ( Family ) -

ग्रेमिनी ( Gramineae )


वृद्धि का स्वभाव ( Habit of growth ) -

यह एक बहुवर्षीय खरपतवार है तथा एक बहुशाखीय झाडीनुमा पौधा है । यह प्रमुखतः अकृषिकृत जैसे सड़कों के किनारे व चटटनों के आस - पास पाया जाता है । कृषिकृत क्षेत्रों में भी यह बहुतायत से पाया जाता है और फसलों को नुकसान पहुंचाता है । खरीफ ऋतु की फसलों में उगने वाला यह एक प्रमुख खरपतवार है । यह गर्म व नर्म मौसम में अधिक वृद्धि करता है ।


प्रसारण ( Propagation ) -

इसका प्रसारण बीजों व भूमिगत तनों द्वारा होता है । यह एक चिरस्थायी प्रसारणशील घास है जिस पर पतली पत्तियाँ तथा शाखाओं पर कोमल पुष्प भी आते हैं ।


आर्थिक महत्व ( Economic impotance ) -

हरी दूब का प्रयोग बहुत सी औषधियाँ बनाने में किया जाता है । इससे नेत्र चिकित्सा, अजीर्णता, मधुमेह तथा हिचकी आदि रोगों के लिये औषधि तैयार की जाती है । मृदा क्षरण नियन्त्रण में यह खरपतवार अत्यन्त लाभकारी है व पशुओं के लिये चारे के रुप में भी इसका प्रयोग होता है । लॉन की सुन्दरता बढ़ाने के लिये इसकी कुछ जातियों को उगाया जाता है ।


नियन्त्रण की विधियाँ ( Methods of Control ) -

ग्रीष्मकालीन जुताई इस खरपवतार के नियन्त्रण के लिये बहुत लाभकारी सिद्ध हुई है । इस खरपतवार को विभिन्न रसायनों जैसे Dalopon TCA को 2-5 किग्रा./है० की दर से छिड़कने पर नियन्त्रित किया जा सकता है ।


2. बथुआ ( Dog's Tooth Grass )


सामान्य नाम ( Local Name ) -

बथुआ ।


वैज्ञानिक नाम ( Scientific Name ) -

Chenopoduim album


कुल ( Family ) -

Chenopodiaceae


वृद्धि का स्वभाव ( Habit of growth ) -

यह एकवर्षीय खरपतवार है । यह सीधा वृद्धि करता है और इसकी ऊँचाई 60-70 सेमी. तक बढ़ती है । इसकी पत्तियाँ चौड़ी होती हैं तथा यह प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उगने की क्षमता रखता है । यह मुख्यत: रबी की फसलों जैसे गेहूँ, चना, जौ, मटर तथा आलू आदि में बहुत अधिक संख्या में उग जाता है । इन फसलों के अलावा सिंचाई की नालियों व कृषि प्रक्षेत्र के आस पास भी यह उगता पाया जाता है ।


प्रसारण ( Propagation ) -

इसका प्रसारण बीजों द्वारा होता है । इसके पौधे में बीज उत्पन्न करने की अद्भुत क्षमता पाई जाती है । यह एकवर्षीय पौधा होते हुये भी अपने जीवनकाल में 70,000 से भी अधिक बीज पैदा करता है ।


आर्थिक महत्व ( Economic Importance ) -

बथवे के पौधे की पत्तियों व अन्य भाग सब्जी के रूप में प्रयोग किया जाते हैं । दीर्घायु के लिये इसके साग का सेवन उपयोगी माना जाता है । इसमें एकेरीडोल नामक मुख्य तत्व पाया जाता है इसका उपयोग पेचिश (dysentery) जैसे असाध्य रोगों में भी किया जाता है ।


नियन्त्रण की विधियाँ ( Methods of Control ) -

ग्रीष्मकालीन मौसम में खेत की कई बार गहरी जुताई करनी चाहिये । फूल व बीज बनने की अवस्था से पूर्व खुरपी की सहायता से उखाड़कर इसको नष्ट कर देना चाहिये । इस खरपतवार को नष्ट करने के लिये 2, 4-D, MCPA, प्रोपाक्लोर, लिनयूरोन आदि का प्रयोग लाभकारी होता है ।


3. मौथा ( Nut Grass )


सामान्य नाम ( Local Name ) -

मौथा, मूथा ।


वैज्ञानिक नाम ( Scientific Name ) -

Cyperus rotundus.


कुल ( Family ) -

Cyperaceae


वृद्धि का स्वभाव ( Habit of growth ) -

यह एक बहुवर्षीय खरपतवार है । यह कृषिकृत एवं अकृषिकृत दोनों क्षेत्रा में उगता हुआ पाया जाता है । इसका पौधा प्रतिकूल परिस्थितियों में उगने की विशेष क्षमता रखता है । यह खरपतवार धान, जूट, मक्का जैसी फसलों को विशेषतः हानि करता है । भौगोलिक दृष्टि से यह हमारे देश में आंध्र प्रदेश, हरियाणा जैसे अनेक राज्यों में उगता हुआ पाया जाता है । इसके पत्ते लम्बे व पतले होते हैं तथा भूमिगत जड़ें कन्द से निकलती हैं ।


प्रसारण ( Propagation ) -

मौथे की जड़ो में कन्द पाये जाते हैं । इन कन्दों का जड़ो में जाल सा बिछा रहता है और ये नये पौधों को जन्म देते रहते हैं ।


आर्थिक महत्व ( Economic Impotance ) -

मौथे के ताजे कन्द के रस को अदरक के रस में शहद के साथ लेने से आमतिसार में लाभ होता है । इसकी जड़ को घिसकर घी में मिलाकर व्रण पर लगाने से लाभ होता है । इसके मूल कन्द के सेवन से पसीना व मूत्र आता है तथा मुख से लार गिरना बन्द हो जाता है । इसकी जड़ो से अगरबत्ती भी बनती है ।


नियन्त्रण की विधियाँ ( Methods of control ) -

ग्रीष्मकालीन मौसम में खेत की बार - बार गहरी जुताई इस पर नियन्त्रण के लिये लाभकारी होती है । लॉन इत्यादि में उगते हुये उस खरपतवार को मोवर (mouer) को बार - बार घुमाकर नियन्त्रित किया जाता है । फसल प्रबन्ध के रूप में हरी खाद जैसे सनई को उगाकर इस खरपतवार को नष्ट किया जा सकता है रसायनों द्वारा इसको नष्ट करने के लिये 2, 4-D; MCPA, EPTC, सीमाजीन, एट्राजीन, एमीट्रोल, पैराकुआट व डालापॉन प्रभावशाली सिद्ध हो चुके हैं ।


4. गाजरघास ( Congress Grass )


सामान्य नाम ( Local Name ) -

गाजर घास, कांग्रेस घास ।


वैज्ञानिक नाम ( Scientific Name ) -

Parthenium hysterphorus


कुल ( Family ) -

कम्पोजीटी ( Compositae )


वृद्धि का स्वभाव ( Habit of growth ) -

यह एकवर्षीय खरपतवार है । इस खरपतवार को सड़कों के किनारों पर उगता हुआ पाया जाता है । यह खरपतवार आंध्रप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में फैला हुआ मिलता है । इसका पौधा नम भूमि में उग जाता है । यह खरपतवार खरीफ के मौसम में अनेक फसलों के साथ जैसे मक्का, ज्वार, बाजरा, धान आलू आदि के साथ उगता हुआ पाया जाता है ।


प्रसारण ( Propagation ) -

इसका प्रसारण बीजों द्वारा होता है ।


नियन्त्रण की विधियाँ ( Methods of control ) -

सस्य क्रियाओं द्वारा इसका निदान संभव नहीं है । विभिन्न रसायनों का प्रयोग जैसे सीमाजीन, एट्राजीन, डाइयूरोन आदि इस खरपतवार को नष्ट करने में प्रभावकारी पाये गये हैं । 2,4-2 व पैराकुआट दोनों रसायनों का मिश्रण भी इस खरपतवार को सफलतापूर्वक नष्ट कर देता है ।


5. कांस ( Tigergrass )


सामान्य नाम ( Local Name ) -

कांस, सरकन्डा ।


वैज्ञानिक नाम ( Scientific Name ) -

Saccharum spontaneum


कुल ( Family ) -

ग्रेमिनी ( Gramineae )


वृद्धि का स्वभाव ( Habit of growth ) –

कांस एक बहुवर्षीय खरपतवार है । इसका पौधा लम्बा व सीधा बढ़ने वाला होता है । इसकी पत्तियाँ नुकीली एवं कठोर होती हैं । कांस की जड़े भूमि में 5-10 मी० की गहराई तक पहुँच जाती है व अधिक जल को धारण करने वाली होती हैं ।


प्रसारण ( Propagation ) -

कांस के पौधे का प्रसारण दो प्रकार से होता है -
( क ) बीजों का प्रसारण ( Propagation through seeds )
( ब ) प्रकन्दों द्वारा प्रसारण ( Propagation through rhizomes )


आर्थिक महत्व ( Economic Importance ) -

( i ) कांस का प्रयोग चटाई व रस्सियाँ बनाने में होता है ।
( ii ) इसका प्रयोग छप्पर बनाने में भी किया जाता है ।


नियंत्रण की विधियां ( Methods of control ) -

( i ) ग्रीष्मकाल में खेत की गहरी जुताई
( ii ) हाथ से प्रकन्दों को इकट्ठा करना
( iii ) खेत में हरी खाद का उगाना
( iv ) डाइयूरोन (diuron) 10 किग्रा./है. की दर से ग्रीष्म ऋतु में प्रयोग करना उत्तम है ।

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