गेहूं, धान, मक्का इत्यादि फसलों में लगने वाले खरपतवार एवं उनका नियन्त्रण

गेहूं, धान, मक्का, गन्ना एवं आलू इत्यादि फसलों में कई प्रकार के खरपतवार लगते है और विभिन्न विधियों द्वारा उन खरपतवारों का नियन्त्रण किया जाता है ।

फसलों में विभिन्न विधियों द्वारा खरपतवार नियन्त्रण (crop weeds and their control in hindi) का ज्ञान अत्यन्त आवश्यक है । खरपतवारनाशियों के प्रयोग की दर एवं अन्य कृषण क्रियाओं को जलवायु एवं भूमि सम्बन्धी कारक प्रभावित करते हैं ।

अतः रासायनिक विधि एवं अन्य विधियों द्वारा खरपतवार नियन्त्रण (weed control in hindi) करने के लिये विशेष अनुभव की आवश्यकता होती है ।


विभिन्न फसलों में लगने वाले खरपतवार एवं उनका नियन्त्रण कैसे करें? | crop weeds and their control in hindi

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गेहूं, धान, मक्का इत्यादि फसलों में लगने वाले खरपतवार एवं उनका नियन्त्रण


निम्नलिखित फसलों में लगने वाले खरपतवार एवं उनका नियन्त्रण की विधियां -

  • गेहूं ( Wheat )
  • धान ( Paddy )
  • मक्का ( Maize )
  • गन्ना ( Sugarcane )
  • आलू ( Patato )


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1. गेहूं की फसल में लगने वाले खरपतवार एवं उनके नियन्त्रण की विधियां


गेहूँ की फसल में पाए जाने वाले प्रमुख खरपतवार -

मंडूसी, जंगली जई, दूबघास, बथुआ, प्याजी, हिरखुरी, कृष्णनील, मटरी, पोहली, सैंजी, मुनमुना तथा सत्यानाशी ।


गेहूं की फसल में लगने वाले खरपतवारों का नियन्त्रण -

गेहूँ की फसल में खरपतवारों के नियन्त्रण हेतू हाथ से उखाड़ना एक सामान्य विधि है परन्तु इसमें अधिक श्रम व धन की आवश्यकता होती है ।

अतः इसके स्थान पर रसायनों का प्रयोग सस्ता एवं प्रभावशाली सिद्ध हो चुका है ।

गेहूं की फसल में 2, 4-D व M C PA रसायनों का प्रयोग सफलतापूर्वक हो चुका है । गेहूँ की फसल में बुवाई के 25-30 दिन बाद इन रसायनों का प्रयोग करना चाहिये । 2, 4-D लवण खरपतवारनाशी (क्रियाशील तत्व) 2, 4-D एमाइन उचित है ।

गेहूँ की मामा (phalaris minor)जंगली जई (avena fatua) को नियंत्रित करने के लिये Isoproturon (०75 किग्रा./है.) की दर से प्रयोग करना चाहिये ।


2. धान की फसल में लगने वाले खरपतवार एवं उनके नियन्त्रण की विधियां


धान की फसल में पाए जाने वाले प्रमुख खरपतवार -

जंगली धान, सावां मकड़ा, कौंदों, वानरा, दूबघास, सफेद मुर्ग भंगड़ा, कनकवा, जंगली जूट, जलकुम्भी तथा सांवक ।


धान की फसल में लगने वाले खरपतवारों का नियन्त्रण -

2, 4-D व M.C.PA धान की फसल में खरपतवारों को नष्ट करने के लिये प्रभावशाली पाये गये हैं । विभिन्नरसायनों के प्रयोग की दर व समय विभिन्न परिस्थितियों के अनुसार अलग - अलग हैं व विभिन्न खरपतवारों के लिए भी रसायनों की मात्रा भिन्न - भिन्न होती है ।

धान फसल में 2, 4-D, MCPA, 2,45 -T आदि रसायनों का रोपाई (transplanting) के 30 दिन पश्चात 1-1(1/2 किग्रा०/है.) 500 मीटर जल में घोल बनाकर प्रयोग करना चाहिये उपरोक्त के अतिरिक्त TOKE - 25 बेसालीन, stam F - 34 आदि रसायनों का प्रयोग भी प्रभावकारी सिद्ध हो चुका है ।


3. मक्का की फसल में लगने वाले खरपतवार एवं उनके नियन्त्रण की विधियां


मक्का की फसल में पाये जाने वाले खरपतवार -

दूब, मकड़ा, सांवक, कौंदों मौथा, जंगली जूट, जामियाँ, लहसुआ, हजारदाना, सफेद मुर्ग जंगली पालक, बड़ी दुद्धी पथरचटा तथा कनकवा आदि ।


धान की फसल में लगने वाले खरपतवारों का नियन्त्रण -

अंकुरण से पूर्व, 2,4-D को सोडियम लवण लगभग 750 ग्राम/हैक्टर की दर से प्रयोग किया जाता है । इसके अतिरिक्त सीमाजीन अंकुरण से पूर्व 2 किग्रा०/है की दर से प्रयोग करने पर मौथा व दूब को नष्ट कर देता है ।

खुरपी की सहायता से अंकुरण के पश्चात् निराई गुड़ाई (hand weeding) करने से भी बहुत से खरपतवार नष्ट हो जाते हैं ।


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4. गन्ना की फसल में लगने वाले खरपतवार एवं उनके नियन्त्रण की विधियां


गन्ने की फसल में पाये जाने वाले प्रमुख खरपतवार -

दूब, बर, सावंक, मकडा, कौदों, हिरनबुरी जंगली चौलाई लहसुआ धतूरा, सफेद मुर्ग हजारदाना, पत्थरचटा, जंगली पालक तथा कनकवा आदि ।


गन्ना की फसल में लगने वाले खरपतवारों का नियन्त्रण -

गन्ने के खेत में विभिन्न खरपतवारों को नष्ट करने के लिये फावड़े, खुरपी तथा कस्सी की सहायता से खुदाई व अन्य कृषण क्रियाएँ की जाती है ।

उपरोक्त क्रियाओं के अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के रसायनों का प्रयोग जैसे 2, 4-D सीमाजीन, एट्राजीन, डालापान, पैराक्वाट व इनके मिश्रण प्रभावशाली तरीकों से खरपतवारों को नियंत्रित कर चुके हैं ।

2, 4-D (एमाइन, एस्टर एवं लवण) लगभग 750 ग्राम/है. (a.i) प्रयोग करते हैं । इसी तरह सीमाजीन 1.5 किग्रा./है . (a.i) की दर से प्रयोग किया जाता है ।

उपरोक्त रसायनों को 500 लीटर जल में घोल बनाकर मिट्टी चढ़ाने के बाद गन्ने की फसल में प्रयोग करना, अन्य अवस्थाओं की तुलना में अधिक लाभकारी रहता है ।


5. आलू की फसल में लगने वाले खरपतवार एवं उनके नियन्त्रण की विधियां


आलू की फसल में पाए जाने वाले प्रमुख खरपतवार -

बथुआ, प्याजी हिरनखुरी, पोहली, कृष्णनील, मौथा आदि ।


आलू की फसल में लगने वाले खरपतवारों का नियन्त्रण -

Metribuzin या Fluchloralin का 1 किग्रा./ है । (सक्रिय अवयव) की दर से प्रयोग बुवाई के पश्चात करना चाहिये । इसके प्रयोग के तुरन्त बाद खुरपी की सहायता से निराई - गुराई अवश्य करें ।

यह कार्य बुवाई के 40 दिन बाद करना चाहिये ।

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