विशिष्ट खेती किसे कहते है इसका अर्थ, परिभाषा एवं ‌इसके लाभ व हानि

Agricultural Study
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विशिष्ट खेती (specialised farming in hindi) के अंतर्गत यह आवश्यक है कि फार्म पर आमदनी का एक ऐसा मुख्य स्रोत हो जिससे फार्म की कुल आमदनी का 50% अथवा इससे अधिक प्राप्त होती हो ।

जैसे - चाय बागान, कहवा फार्म, गन्ना फार्म आदि ।


विशिष्ट खेती का अर्थ है? | meaning of specialised farming in hindi

सामान्य अर्थ में विशिष्ट खेती किसी एक कृषि उघम के वर्चस्व से परिपूर्ण खेती है ।

विशिष्ट खेती का अर्थ (meaning of specialised farming in hindi) - कृषि का एक ऐसा प्रकार है जिसमें किसान खेती के किसी एक प्रकार/ढंग के क्रियाकलापों को ही प्रमुखता से अपनाता है ।


विशिष्ट खेती की परिभाषा | defination of specialised farming in hindi

हॉपकिन्स के कथनानुसार -

"विशिष्ट खेती के अन्तर्गत केवल एक ही फसल या उद्यम का उत्पादन बाजार के लिए किया जाता है और किसान अपनी आय के लिए केवल उसी एक उद्यम पर निर्भर रहता है ।"

"Under specialized farming, only one crop or enterprise is produced for the market and the farmer is dependent on only one enterprise for his income.


एडम्स के कथनानुसार विशिष्ट खेती की परिभाषा -

“विशिष्ट खेती से अभिप्राय उन जोतों से है जो अपनी कुल आय का कम से कम 50 प्रतिशत किसी एक उद्यम अथवा फसल से प्राप्त करें ।"

"Special farming means those holdings which get at least 50 percent of their total income from any one enterprise or crop."

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विशिष्ट खेती किसे कहते है इसका अर्थ, परिभाषा एवं ‌इसके लाभ व हानि लिखिए

विशिष्ट खेती के लाभ/गुण | benefits of specialised farming in hindi


विशिष्ट खेती के प्रमुख लाभ निम्नलिखित है -

  • कम पूँजी की आवश्यकता
  • उपज की बिक्री में सुविधा
  • विशेष यन्त्रों का प्रयोग सम्भव
  • पूँजी की बचत
  • फार्म के प्रबन्ध में सुविधा
  • श्रम की कार्यकुशलता में वृद्धि
  • उत्पादन की आधुनिक विधियों का प्रयोग
  • भूमि का उत्तम उपयोग


1. कम पूँजी की आवश्यकता -

खेती शुरू करने के लिए थोड़े धन की आवश्यकता पड़ती है ।


2. उपज की बिक्री में सुविधा -

साधारणतया एक ही प्रकार की उपज पैदा की जाती है । अतः उस उपज की बिक्री में सुविधा रहती है ।


3. विशेष यन्त्रों का प्रयोग सम्भव -

इस प्रकार की खेती में कम तथा विशेष प्रकार के यन्त्रों की आवश्यकता होती है । अत: आधुनिक यन्त्रों और आधुनिक तरीकों का उपयोग हो सकता है ।


4. पूँजी की बचत -

विशेष प्रकार के तथा कम यन्त्रों की आवश्यकता से लागत कम आती है ।


5. फार्म के प्रबन्ध में सुविधा -

सम्पूर्ण फार्म पर एक ही प्रकार की खेती होने से उसकी देखभाल तथा प्रबन्ध करना सरल हो जाता है ।


6. श्रम की कार्यकुशलता में वृद्धि -

एक ही प्रकार की फसलें बोने से कम श्रम की आवश्यकता होती है और एक ही तरह का कार्य करने से श्रम की कुशलता में वृद्धि होती है और उत्पादन व्यय में कमी आती है ।


7. उत्पादन की आधुनिक विधियों का प्रयोग -

फसलों की संख्या कम होने के कारण खेती के उन्नतिशील तरीके आसानी से अपनाए जा सकते हैं ।


8. भूमि का उत्तम उपयोग -

जो भूमि जिस फसल के लिए अधिक उपयुक्त होती है उस पर वही फसल उगाई जाती है, जैसे काली मिट्टी के क्षेत्र में कपास सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है ।

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विशिष्ट खेती की हानियां/दोष | blame of specialised farming in hindi


विशिष्ट खेती के प्रमुख दोष निम्नलिखित है -

  • संसाधनों का पूर्ण उपयोग
  • आय की मात्रा सीमित रहती है
  • हानि की सम्भावना बढ़ जाती है
  • उप - पदार्थों की हानि
  • भूमि की उत्पादन शक्ति का ह्रास


विशिष्ट खेती से होने वाली प्रमुख हानियों का वर्णन कीजिए?


1. संसाधनों का पूर्ण उपयोग -

उत्पत्ति के संसाधनों, भूमि, श्रम, पूँजी का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता है ।


2. आय की मात्रा सीमित रहती है -

इस प्रकार की खेती में वर्ष में केवल एक या दो बार ही आय प्राप्त होती है ।


3. हानि की सम्भावना बढ़ जाती है -

एक ही प्रकार की फसल यदि किसी कारणवश नष्ट हो जाती है अथवा कीमत गिर जाती है, तो किसान को अधिक हानि हो सकती है ।


4. उप - पदार्थों की हानि -

फसल से अथवा मवेशियों से मिलने वाले उप - पदार्थों का सही उपयोग नहीं हो पाता ।


5. भूमि की उत्पादन शक्ति का ह्रास -

ऐसे फार्मों पर एक ही प्रकार की फसल उगाए जाते रहने से कृषक या प्रबन्धक का ज्ञान संकुचित रह जाता है और कृषि के अन्य व्यवसायों का ज्ञान नहीं हो पाता ।

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