कृषि क्या है यह कितने प्रकार की होती है एवं भारत में कृषि का क्या महत्व है

भारत एक कृषि (agriculture in hindi) प्रधान देश है, जिसके पास विश्व की मात्र 2.4 प्रतिशत भूमि है । 

भारत में विश्व की लगभग 7 प्रतिशत प्रजातियां तथा पूरी मानव आबादी का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा निवास करती है ।


कृषि का अर्थ क्या है? (Meaning of agriculture in hindi)


कृषि की उत्पत्ति लैटिन भाषा के दो शब्दों "Ager" तथा "Culture" से हुई जिनका अर्थ है - Ager = मृदा एवं culture = खेती करना । 

अर्थात् कृषि शब्द का अर्थ होता है (meaning of agriculture in hindi), भूमि पर खेती तथा कर्षण क्रिया करना ।


कृषि की परिभाषा (defination of agriculture in hindi)


कृषि की परिभाषा (defination of agriculture in hindi) - "भूमि पर की जाने वाली समस्त क्रियाएँ जो फसलोत्पादन एवं पशुपालन व्यवसाय के लिए आवश्यक है, उन्हें करने की कला एवं विज्ञान को कृषि कहा जाता है ।"


भारतीय कृषि एवं उसके प्रकार (types of indian agriculture in hindi)

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भारतीय कृषि एवं कृषि के प्रकार (Agriculture In Hindi)
 
कृषि (agriculture in hindi) को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया जाता है -


1. प्राथमिक इकाई (Primary unit) -

पौध विज्ञान : शस्य विज्ञान, वन विज्ञान, आरोपित फसलें, मसाले की फसलें, जीवाणु, कवक तथा शैवाल, वृक्ष एवं झाड़ी उत्पादन, उद्यान विज्ञान ।


2. सामान्य कृषि (Secondary unit) -

पशु विज्ञान : गाय, भैंस तथा घोड़ा पालन, भेड़ एवं बकरी पालन, सुअर पालन, सुअर एवं बतख पालन, मधुमक्खी पालन, लाख उत्पादन तथा रेशम पालन ।


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कृषि कितने प्रकार की होती है? (types of agriculture in hindi)


कृषि के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित है -

1. मिश्रित कृषि (Mixed cropping)
2. मिश्रित खेती (Mixed farming)
3. शिफ्टिंग खेती (Shifting cultivation)
4. समोच्च कृषि ( Contour farming )
5. रोपण कृषि ( Plantation farming )
6. पट्टीदार खेती ( Strip cropping )
7. संरक्षित खेती ( Conservative Agriculture )
8. रिले क्रॉपिंग ( Relay Cropping )
9. कृषि वानिकी ( Agro Forestry )

जल - प्राप्ति एवं आर्द्रता के आधार पर कृषि के प्रकार -

1. तर कृषि ( Wet Farming ) 
2. आर्द्र कृषि ( Humid Farming ) 
3. सिंचित कृषि ( Irrigated Farming )

 
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कृषि के प्रमुख प्रकार(types of agriculture in hindi)


1. मिश्रित कृषि ( Mixed cropping )

एक ही खेत में दो या दो से अधिक फसलों को एक साथ उगाना मिश्रित कृषि कहलाता है, जिसका प्रमुख उद्देश्य मृदा क्षरण रोकना तथा विपरीत परिस्थितियों में कम से कम एक फसल का सही ढंग से उत्पादन करना है ।


2. मिश्रित खेती ( Mixed farming )

फसल उत्पादन के साथ - साथ पशुपालन करना मिश्रित खेती कहलाता है ।


3. शिफ्टिंग खेती ( Shifting cultivation )

वनों को जलाकर उनके स्थान पर जगह बदल - बदल कर खेती करना शिफ्टिंग खेती कहलाता है ।


4. समोच्च कृषि ( Contour farming )

पहाड़ी क्षेत्रों पर जो कृषि की जाती है उसे समोच्च कृषि कहा जाता है ।


5. रोपण कृषि ( Plantation farming )

एक विशेष प्रकार की खेती करना, जैसे रबड़, चाय तथा कहवा की खेती करने को है रोपण कृषि कहा जाता है ।


6. पट्टीदार खेती ( Strip cropping )

ढ़ालदार भूमि पर मृदा उत्पादन को कम करने के लिए दलहनी फसलों तथा घास को पट्टियों के रूप में ढ़ाल के विपरीत दिशा में बोना ही पट्टीदार खेती कहलाता है ।


7. संरक्षित खेती ( Conservative Agriculture )

विषम परिस्थितियों में भी फसलों की वृद्धि के लिए आवश्यक अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए ग्रीन हाउस, शेडनेट, प्लास्टिक टनल व मल्चिंग का उपयोग करके खेती करना ही संरक्षित खेती कहलाता है ।


8. रिले क्रॉपिंग ( Relay Cropping )

एक वर्ष में एक ही खेत में चार फसलें लेना (खड़ी फसल में बुवाई करना) रिले क्रॉपिंग या अविराम कृषि कहलाता है ।


9. कृषि वानिकी ( Agro Forestry )

कृषि के साथ - साथ फसल चक्र में पेड़ों, बागवानी व ढाड़ियों की खेती कर फसल व चारे का उत्पादन करना ही कृषि वानिकी कहलाता है ।


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जल - प्राप्ति एवं आर्द्रता के आधार पर कृषि के प्रकार


1. तर कृषि ( Wet Farming )

इस प्रकार की कृषि काँप मिट्टी के उन क्षेत्रों में प्रचलित है, जहाँ पर वर्षा की मात्रा 200 सेमी . से अधिक पाई जाती है । भारत में इस प्रकार की कृषि का प्रसार मध्य व पूर्वी हिमालय क्षेत्र, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, नागालैण्ड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा तथा पश्चिमी समुद्रतटीय मैदानों में है । 

इन क्षेत्रों में फसलोत्पादन के लिए सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती तथा वर्ष में एक से अधिक बार भूमि से कृषि उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है ।

चावल तथा जूट इस प्रकार की खेती के प्रमुख उदाहरण है ।


2. आर्द्र कृषि ( Humid Farming )

यह कृषि काँप तथा काली मिट्टी के उन क्षेत्रों में प्रचलित है जहाँ पर वार्षिक वर्षा 100 से 200 सेमी. के मध्य रहती है । भारत में ऐसे क्षेत्र मध्य एवं पूर्वी गंगा का मैदान, ब्रह्मपुत्र की घाटी, तथा उत्तर - पूर्वी पठारी भाग पर विस्तृत हैं । यहाँ पर वर्ष में दो फसलों के अलावा कभी - कभी जायद फसल भी प्राप्त की जा सकती है ।


3. सिंचित कृषि ( Irrigated Farming )

इस कृषि का प्रसार काँप, काली व लाल, पीली मिट्टी के उन क्षेत्रों में मिलता है जहाँ पर वर्षा की मात्रा 50-100 सेमी. के मध्य होती है, जोकि कृषि के लिए अपर्याप्त होती है । इन भागों में कृषि मुख्य रूप से सिंचाई पर ही निर्भर रहती है । इसका विस्तार पंजाब, हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु व पूर्वी तट पर नदियों के डेल्टा प्रदेशों तक सीमित है । 

यहाँ पर गेहूँ व गन्ना की खेती प्रमुख रूप से की जाती है ।


भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का क्या महत्व है? (Importance of agriculture in hindi)


भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का निम्नलिखित महत्व है -

  • एक व्यवसाय के रूप में तथा जीविकोपार्जन के रूप में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है ।
  • किसी भी राष्ट्र की आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति के लिए कृषि का विकास अत्यंत आवश्यक है ।
  • विभिन्न प्रकार के उद्योगों के लिए भी कृषि के द्वारा कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित होती है ।
  • कृषि का औद्योगिक विकास में भी कृषि (agriculture in hindi) का महत्वपूर्ण स्थान है ।
  • कृषि में देश के भू - क्षेत्र का सर्वाधिक भाग प्रयोग किया जाता है । उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार कुल भू - क्षेत्र के 49.8% भाग में खेती की जाती है । 
  • कृषि देश की 103 करोड़ जनसंख्या को भोजन तथा 36 करोड़ पशुओं को चारा प्रदान करती है । यहाँ यह उल्लेखनीय है कि भारतीयों के भोजन में कृषि उत्पाद ही प्रमुख होते हैं । 

कृषि की मुख्य विशेषतायें क्या है? | characteristics of agriculture in hindi

भारतीय कृषि अपनी कुछ विशिष्ट विशेषताओं के लिये प्रसिद्ध है ।


कृषि की प्रमुख विशेषतायें निम्न है -


कृषि का प्रकृति पर अत्यधिक निर्भर होना -

भारतीय कृषि प्रकृति पर मुख्य रूप से निर्भर करती है । इसीलिये कृषि को 'मानसून का जुआ' कहा गया है कृषि की सभी क्रियायें जैसे बुवाई, सिंचाई, पकाई, कटाई आदि मानसून से प्रभावित होती है । अच्छी वर्षा होने से बोया गया क्षेत्रफल बढ़ जाता है, कम वर्षा से बोया गया क्षेत्रफल बहुत घट जाता है मानसून की अनिश्चितता के कारण कृषि उत्पादन भी अनिश्चित रहता है, कृषि कार्य जोखित भरा होता है ।


कृषि जीवन - यापन की पद्धति -

सामान्यत: कृषि एक अलाभकारी व्यवसाय माना जाता है । अतः किसान अपने जीवन निर्वाह हेतु ही कृषि करता है, न कि लाभ कमाने की दृष्टि से ।


समय बद्धता ( Time bound ) -

कृषि क्रियायें समयबद्ध हैं । एक निश्चित समयावधि में ही कुछ विशिष्ट क्रियायें करना जरूरी होती है । फसलें निश्चित समय पर बोई जाती हैं । समय से पूर्व फसलें नहीं पकती हैं । कोई फसल वर्ष भर बोई, व काटी नहीं जा सकती है ।


कृषि एक जैविक उद्योग है —

फसलोत्पादन व पशुओं - पक्षियों के विकास व परिपक्वता में एक निश्चित समय लगता है । गन्ने की फसल को दो या चार माह में रात - दिन सींचकर तैयार नहीं कर सकते हैं । पशुओं के प्रसवकाल में एक निश्चित समय लगता है ।


श्रम विभाजन की सीमितता -

कृषि में उद्योग की भाँति श्रम विभाजन नहीं किया जा सकता है । कुछ क्रियाओं में श्रम विभाजन असम्भव होता है ।


उत्पादन में पूर्ण विशिष्टीकरण का अभाव -

कृषि में पूर्ण विशिष्टीकरण नहीं किया जा सकता है । गेहूँ का उत्पादन करने में भूसा भी होता है । कुछ फसलें मिश्रित बोने में ही लाभकारी होती


इसके अतिरिक्त कृषि की प्रमुख विशेषताएं निम्न है -

  1. कृषि कार्य साधारणतः छोटे पैमाने पर किया जाता है । बड़े पैमाने पर खेती बहुत कम की जाती है तथा भारतीय परिस्थितियों में उचित भी नहीं है ।
  2. कृषि उत्पादन की इकाइयाँ साधारणत: छोटी और विशाल क्षेत्र में दूर - दूर तक फैली होती हैं । इसीलिये किसान और कृषि श्रमिकों में संगठन का अभाव होता है ।
  3. कृषि के लिये भूमि की सबसे अधिक आवश्यकता होती है ।
  4. कृषि पदार्थों की कीमतों में अत्यधिक उतार - चढ़ाव आता है । फसलें कटकर एक साथ बाजार में आने से उनकी कीमतें बहुत गिरती हैं ।
  5. भारतीय कृषि में पारिवारिक श्रम का अधिक उपयोग होता है ।
  6. कृषि उत्पादन में क्रमांगत उत्पत्ति ह्रास नियम शीघ्र लागू होता है ।
  7. कृषि उत्पादों का वर्गीकरण व श्रेणीकरण कठिन होता है, क्योंकि कृषि उत्पादों में एकरूपता का अभाव होता है ।
  8. कृषि उत्पादों को अधिक समय तक टिकाऊ रखना कठिन होता है ।
  9. कृषि व्यवसाय अगतिशील होता है । खड़ी फसल को तुरन्त दूसरे स्थान पर नहीं ले जा सकते हैं ।
  10. कृषि उद्योग श्रम प्रधान है, न कि पूँजी प्रधान ।


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