चारे के लिए लुसर्न या रिजका की खेती (rijika ki kheti) कैसे करें पूरी जानकारी

लुसर्न या रिजका का वानस्पतिक नाम (Botanical Name) - मेडिकागो सेटाइवा (Medicago sativa)


लुसर्न या रिजका का कुल (Family) - लैग्युमिनोसी (Leguminoceae)


भारत में लुसर्न या रिजका की खेती (rijika ki kheti) मुख्यत: चारे के लिए ही की जाती है ।


लुसर्न या रिजका का अरबी भाषा का नाम एल्फा-एल्फा (alfa-alfa) होता है , इसीलिए इसे एल्फा-एल्फा घास भी कहा जाता है ।


लुसर्न या रिजका (lusarn ya rijika) चारे वाली एक फलीदार फसल (Legume forage crop) है, लुसर्न को चारे वाली फसलों की रानी भी कहा जाता है ।


लुसर्न या रिजका के फायदे


रिजका की फसल (rijika ki fasal) मुख्य रूप से पशुओं के लिए पौष्टिक चारे के लिए उगाई जाती है ।


इसमें प्रोटीन 18-22%, वसा 3%, कार्बोहाइड्रेट्स 40%, खनिज लवण -12% तथा विटामिन्स व अन्य पोषक तत्व जैसे - कैल्शियम, मैग्नीशियम व फास्फोरस भी पाए जाते हैं ।


अत: पशुओं के लिए प्रोटीन एवं पोषक तत्वों की पूर्ति करने वाला यह एक उत्तम चारा है ।


रिजका की फसल से अधिक मात्रा में हरा चारा प्राप्त होता है तथा यह बरसीम की फसल (barseem ki kheti) की अपेक्षा लम्बी अवधि तक पशुओं के लिए हरे चारे एवं राशन की आपूर्ति करता है ।


इसके अतिरिक्त लुसर्न फलीदार फसल (leguminous crop) होने के कारण भूमि में नाइट्रोजन संचित करती है और उसे उर्वर बनाती है ।


लुसर्न या रिजका का उत्पत्ति स्थान एवं इतिहास


लुसर्न या रिजका का उत्पत्ति स्थान ईरान व अफगानिस्तान के निकटवर्ती पश्चिमी एशियाई क्षेत्र माना जाता है ।


यहीं से रिजका की खेती (rijika ki kheti) प्रचार व प्रसार विश्व के अन्य देशों को हुआ तथा भारत में इसका आगमन सन् 1900 में हुआ ।


लुसर्न या रिजका की खेती का भौगोलिक वितरण


लुसर्न की फसल (lusarn ki fasal) अपनी व्यापक सहन क्षमता के कारण चारे के रूप में अनेक पश्चिमी देशों में प्राचीनकाल से उगाई जाती रही है ।


वर्तमान समय में लुसर्न या रिजका की खेती (lusarn ya rijika ki kheti) करने वाले देशों में अमेरिका, रूस, आस्ट्रेलिया, भारत व फ्रांस आदि देश प्रमुख हैं ।

भारत में लुसर्न या रिजका की खेती लगभग सभी प्रान्तों में की जाती है ।


लुसर्न या रिजका का वानस्पतिक विवरण


लुसर्न का वानस्पतिक नाम Medicago sativa है । यह ‘लैग्युमिनोसी' (Leguminoceae) परिवार का पौधा है ।


यह एक बहुवर्षीय (perennial) पौधा है जिसकी ऊँचाई 70 से 120 सेमी. तक होती है तथा गहरी मूसला जड़ होने के कारण यह भूमि में गहराई से भी जल शोषण कर लेती है ।

इसकी पत्तियाँ तीन पत्तों वाली होती है व इसके फूल गुलाबी नीले रंग के होते हैं ।


लुसर्न या रिजका की खेती के लिए उचित जलवायु


रिजका की खेती (rijika ki kheti) विभिन्न प्रकार की जलवायु में की जा सकती है ।

इसके लिए ठण्डी एवं आर्द जलवायु अनुकूल होती है परन्तु लुसर्न या रिजका की खेती शुष्क एवं गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में भी सफलापूर्वक की जा सकती है ।


इसका कारण है, कि इसकी जड़ें भूमि में गहराई तक जाकर नमी का शोषण करने की क्षमता रखती हैं ।

यह 5°C तक ठण्डा एवं 49°C तक गर्म तापमान को सहन कर लेती है ।


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चारे के लिए लुसर्न या रिजका की उन्नतशील खेती कैसे करें?


भारत में लुसर्न या rijika की उन्नतिशील खेती का वर्णन निम्न प्रकार है -

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चारे के लिए लुसर्न या रिजका की खेती (rijika ki kheti) कैसे करें पूरी जानकारी

लुसर्न या रिजका की खेती के लिए उपयुक्त भूमि एवं भूमि की तैयारी


लुसर्न की फसल (lusarn ki fasal) के लिए उदासीन दोमट मृदा सर्वोत्तम होती है ।

मृदा का उपयुक्त pH मान 6.5 से 7.5 तक होना चाहिए ।


अम्लीय व जलमग्न मृदाएँ लुसर्न या रिजका की खेती (rijika ki kheti) के लिए उपयुक्त नहीं है ।

बुवाई के लिए खेत की मिट्टी को अन्य फसलों की भाँति बारीक एवं भुरभुरा बना लिया जाता है ।


लुसर्न या रिजका की खेती के लिए उपयुक्त जातियाँ


  • सिरसा - 9
  • T - 8
  • T - 9
  • आनन्द -1
  • आनन्द -2
  • IGFRI - 54 तथा IGFRI - 244 आदि ।


रिजका की खेती में फसल चक्र एवं मिलवां खेती


खरीफ की फसलों जैसे - ज्वार, ग्वार, लोबिया, मक्का व धान की कटाई के पश्चात् फसल चक्रों में रिजका की खेती (rijika ki kheti) भारतवर्ष में रबी के मौसम में की जाती है ।

यह एक गहरी जड़ वाली फसल है ।


अतः इसके साथ उथली जड़ वाली फसलें अन्त: फसली कार्यक्रम में सम्मिलित की जा सकती हैं ।


लुसर्न या रिजका की खेती कब की जाती है?


उत्तरी भारत में लुसर्न की बुवाई का उपयुक्त समय रबी मौसम में अक्टूबर माह होता है ।


रिजका की बीज दर कितनी होती है?


इसकी बुवाई पंक्तियों में या छिटकवां विधि से की जाती है ।


छिटकवां विधि से बुवाई करने पर बीज की 20-25 किग्रा./हैक्टेयर मात्रा की आवश्यकता पड़ती है ।

बीज छोटा होने के कारण 1-2 सेमी. से अधिक गहराई पर नहीं बोना चाहिए ।


यदि फसल खेत में प्रथम बार बोई जा रही हो तो राइजोबियम कल्चर या लुसर्न या रिजका की फसल के खेत की मिट्टी से उपचार करना चाहिए ।


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लुसर्न या रिजका की खेती के लिए आवश्यक खाद एवं उर्वरक की मात्रा


लुसर्न एक फलीदार फसल होने के कारण इसके लिए नाइट्रोजन की कम आवश्यकता पड़ती है ।


एक हैक्टेयर फसल के लिए 20 किग्रा. नाइट्रोजन व 60 किग्रा. फास्फोरस पर्याप्त होता है ।

इसके अतिरिक्त गोबर की सड़ी खाद का प्रयोग भी बहुवर्षीय फसल हेतु लाभदायक रहता है ।


लुसर्न या रिजका की खेती के लिए आवश्यक सिंचाई


प्रथम सिंचाई पलेवा के रूप में तथा अंकुरण के बाद 15 दिन के अन्तराल पर सिंचाई करनी चाहिए ।


ग्रीष्मकाल में तापमान बढ़ने पर 10 से 12 दिनों के अन्तराल पर सिंचाई करते हुए कुल 18-20 सिंचाइयाँ करनी चाहिए ।

यह फसल बरसीम की तुलना में सूखे के प्रति अधिक सहनशील होती है ।


लुसर्न या रिजका की फसल सुरक्षा


बहुवर्षीय फसल होने के कारण लुसर्न में दो बार खरपतवारों से बचाव के लिए निराई - गुड़ाई करनी चाहिए ।

यदि आवश्यक हो तो खरपतवारनाशी का प्रयोग भी किया जा सकता है ।


रिजका की फसल के प्रमुख रोग -

  • पर्णधब्बा
  • जड़गलन
  • सूखा रोग
  • घुन (weevil) कीट

आवश्यकतानुसार रसायनों के प्रयोग से इन्हें नष्ट किया जा सकता है ।


लुसर्न या रिजका की फसल कितने दिन में तैयार हो जाती है?


लुसर्न या रिजका की अक्टूबर माह में बोई गई फसल बुवाई के लगभग 50 दिनों पश्चात् प्रथम कटाई के योग्य हो जाती है ।


लुसर्न या रिजका की फसल की कटाई कब की जाती है?


तत्पश्चात् प्रत्येक माह में एक कटाई करनी चाहिए तथा कुल एक वर्ष में 7-8 कटाइयाँ की जा सकती हैं ।


बीज के लिए बोई गई लुसर्न की फसल की फरवरी माह के बाद चारे के लिए कटाई बन्द कर देनी चाहिए ।

मई - जून में फसल बीज की कटाई के लिए तैयार हो जाती है ।


लुसर्न या रिजका की फसल से प्राप्त उपज


एक हैक्टेयर खेत में लुसर्न का लगभग 600 से 700 क्विटल हरा चारा प्राप्त होता है तथा लगभग दो क्विटल रिजका का बीज का उत्पादन भी होता है ।


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