मक्का की खेती कैसे करें पूरी जानकारी | Makka ki kheti | Farming Study

मक्का का वानस्पतिक नाम (Botanical Name) - जिया मेज़ (Zea mays L.)


मक्का का कुल (Family) - ग्रेमिनी या पोएसी  (Gramineae)


मक्का में गुणसूत्र संख्या - 2n = 20


मक्का भारत की एक प्रमुख खाद्यान्न फसल है, भारत में मक्का की खेती (makka ki kheti) मुख्य रूप से दाने, चारे तथा भुट्टे के लिये की जाती है ।


अन्य धान्य फसलों विशेषतया: धान व गेहूँ की तुलना में मक्का की फसल (makka ki fasal) की उत्पादकता अधिक होती है ।


यह एक खाद्यान्न फसल होने के साथ - साथ औद्योगिक महत्व की फसल भी है ।


मक्का का आर्थिक महत्व


मक्का में कार्बोहाइड्रेट 71%, प्रोटीन 9 %, वसा 5% खनिज लवण 4% तथा शेष जल पाया जाता है ।


सम्पूर्ण विश्व में मक्का की खेती (makka ki kheti) का अपना एक विशिष्ट स्थान है ।


संयुक्त राज्य अमेरिका की कृषि अर्थव्यवस्था में मक्का की फसल (makka ki fasal) एक आधार स्तम्भ मानी जाती है ।


मक्का का उत्पत्ति स्थान एवं इतिहास


मक्का की उत्पत्ति के सम्बन्ध में वैज्ञानिकों में मतभेद रहा है ।

कुछ विद्वान एशिया महाद्वीप को मक्का का जन्म स्थान मानते है ।


अन्य विद्वानों के अनुसार,


अमेरिका में मक्का की खेती (makka ki kheti) प्राचीन काल से की जाती है ।

ऐसा अनुमान है, कि अमेरिका से ही मक्का विश्व के अन्य देशों में फैली है ।


मक्का का भौगोलिक वितरण


विश्व के विभिन्न गोंद तथा फरूखाबाद, देशों में मक्का में खेती बड़े स्तर पर की जाती है ।

इन देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, युगोस्लाविया, रूमानिया, अर्जेन्टाइना, चीन ब्राजील व भारत आदि हैं ।


भारत में मक्का की खेती लगभग सभी राज्यों में की जाती है ।

उत्तर प्रदेश में बुलन्दशहर, अलीगढ़, रामपुर, खीरी तथा बहराइच आदि जिलों में मक्का की खेती (makka ki kheti) होती है ।


मक्का का वानस्पतिक विवरण


मक्का के पौधे का वानस्पतिक नाम Zea mays L. है, इसका पौधा Gramineae कुल के अन्तर्गत आता है ।


यह एकवर्षीय व बड़े आकार वाला पौधा होता है ।

इसकी ऊँचाई 1 से 3 मीटर तक होती है ।


मक्का के पौधे में जड़, तना, पत्तियाँ, पुष्प व दाना आदि भाग होते हैं ।

इसके पौधे में प्राथमिक, शिखर व हवाई तीन प्रकार की जड़ें पायी जाती हैं ।


पौधे का तना 15-20 कलियों से युक्त होता है ।

पौधे में 10 से 15 तक पत्तियाँ विकसित हो जाती हैं ।

पत्तियों पर दोनों ओर रन्ध्र (stomata) पाये जाते हैं ।


मक्का का पुष्पक्रम दो प्रकार का होता है -


पौधे के दो अलग - अलग भागों पर फूल लगते हैं ।

मक्का का दाना एकबीजीय होता है ।


मक्का की खेती के लिए उचित जलवायु


मक्का एक ग्रीष्मकालीन फसल है ।

पकते समय गर्म व शुष्क मौसम उपयुक्त रहता है ।


मक्का जलभराव तथा पानी की कमी के प्रति काफी संवेदनशील है ।

अत: अधिक वर्षा एवं सूखे जैसी स्थितियाँ इसके लिये अनुकूल नहीं होती हैं ।


मक्का की खेती (makka ki kheti) समुद्र तल से लेकर 12000 मीटर तक की ऊँचाई वाले क्षेत्रों में की जाती है ।


मक्का की खेती कब की जाती है?


भारत में मक्का की खेती वर्षा, बसन्त व ग्रीष्म ऋतुओं में की जाती है ।

खरीफ तथा जायद के मौसमों में मक्का की खेती (makka ki kheti) की जाती है ।


पर्याप्त वर्षा वाले क्षेत्रों में जहाँ 50-500 सेमी. तक वर्षा होती है तथा फसल के पूरे जीवन - चक्र में मृदा में नमी बनी रहती है, मक्का सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है ।


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मक्का की फसल हेतु कितने तापमान की आवश्कता होती है?


बुवाई के समय 20°C तापमान उपयुक्त रहता है ।

पौधों की वृद्धि के समय 25°C तापमान होना चाहिये ।


मक्का की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी


मक्का की फसल के लिये दोमट मिट्टी उपयुक्त है ।

मिट्टी में वायु संचार पर्याप्त मात्रा में होना चाहिये ।


इसके लिये pH 6-0-7.0 वाली भूमियाँ उपयुक्त होती हैं ।

दाने के लिये मक्का की अच्छी उपज लेने हेतु अपनाई जाने वाली सस्य तकनीक


मक्का की खेती कैसे करें? | Makka ki kheti kaise kare?


भारत में भी मक्का गरीब व अमीर सभी वर्गों का प्रमुख भोजन है ।

यहाँ पर इसे अनाज, चारे व भुट्टों के रूप में प्रयोग किया जाता है ।

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दुधारू पशुओं के लिये मक्का का चारा बहुत गुणकारी होता है । 


मुर्गियों व सुअरों के राशन के अतिरिक्त मक्का का औद्योगिक स्तर पर ऐल्कोहॉल, तेल, कागज, रेशम उद्योग आदि में व्यापक उपयोग होता है ।


मक्का की खेती कैसे की जाती है, पूरी जानकारी?


भारत में मक्का को दाने एवं चारे दोनों के लिए उगाया जाता है ।

भारत में मक्का की खेती (makka ki kheti) खरीफ एवं जयाद दोनों मौसम में की जाती है ।


मक्का की खेती के लिए उपयुक्त जाति का चुनाव


वर्तमान समय में उपलब्ध मक्का की जातियों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है, इनमें से जाति का चुनाव करना पड़ता है ।


मक्का की किस्मों की तीन श्रेणियाँ निम्न प्रकार है -


( i ) देशी मक्का -

इन जातियों की बुवाई से लेकर कटाई तक 80 से 90 दिनों का समय पर्याप्त रहता है ।

इन जातियों की उपज संकर व संकुल जातियों की कम होती है ।


देशी जातियों की कम लोकप्रियता का प्रमुख कारण इनकी उपज उपयुक्त स्थान व समय के अनुसार तुलना में की तुलना का कम होना है ।

अतः ये जातियाँ किसानों द्वारा अपनाने में संकोच बना रहता है ।


मक्का की देसी किस्में -

KT 41, जौनपुरी, रूद्रपुरी, लोकल व मेरठी आदि । 


( ii ) मक्का की हाइब्रिड/संकर किस्में -


गंगा सफेद -2, गंगा -5, गंगा -9, डेकन, डेकन -103, हिमालयन -123, हिमालयन -128, हिस्टार्च, गंगा -4, गंगा -3, गंगा -101, पूसा अर्ली हाइब्रिड बी० एल -54 आदि ।


( iii ) संकुल मक्का -

ये जातियाँ बुवाई से लेकर कटाई तक 90 से 110 दिनों का समय लेती हैं ।


संकर मक्का की तुलना में इन जातियों को उगाने का लाभ यह है कि किसान इनका बीज एक बार खरीदकर 3-4 वर्षों तक प्रतिवर्ष अपनी फसल के बीज के रूप में प्रयोग कर सकता है ।

इन जातियों की उपज देशी व संकर जातियों में अपेक्षाकृत अधिक होती है ।


मक्का की संकुल किस्में -

विजय, किसान, विक्रम, सोना, जवाहर व अम्बर आदि ।


सबसे अच्छी मक्का कोन सी है?


मक्का की प्रमुख किस्में -

  • माही
  • सरताज
  • नवीन
  • कंच
  • श्वेता
  • नवज्योति
  • आजाद
  • गौरव
  • उत्तम
  • सूर्या
  • प्रभात
  • अगेती 76
  • हर्षा
  • मंसर
  • अरूण
  • रेणुका
  • प्रकाश व किरण आदि है ।


मक्का की वैरायटी


बसंत कालीन मक्का की किस्में -

  • डेकन 103
  • डेकन 105
  • गंगा -11
  • त्रिशूलेट
  • डेकन-1


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मक्का की खेती के लिए भूमि का चुनाव कैसे करें?


मक्का की फसल के लिये दोमट, नम व भुरभुरी मिट्टी का चुनाव करना चाहिये ।


भूमि में पर्याप्त वायु संचार आवश्यक है ।

जल निकास की सुविधा होनी चाहिये ।


मक्का की फसल (makka ki fasal) के लिये उपयुक्त भूमि का pH 6 से 7 के बीच होना चाहिये ।


मक्का की खेती के लिए भूमि की तैयारी कैसे करें?


मक्का की फसल के लिये जून के दूसरे सप्ताह में खेती की तैयारी प्रारम्भ कर देनी चाहिये ।

भूमि में नमी की कमी के कारण एक पलेवा करना आवश्यक होता है ।


तत्पश्चात् मिट्टी पलटने वाले हल से एक गहरी जुताई लाभकारी होती है, फिर दो या तीन बार हैरो चलाकर खेती की मिट्टी को बारीक एवं भुरभुरी कर लेते हैं ।

असमतल खेत को समतल करने के पश्चात् ही मक्का की फसल उगाई जानी चाहिये ।


मक्का की खेती कब की जाती है?


मक्का की फसल की बुवाई वर्षा प्रारम्भ होने पर 15 जून से जौलाई तक की जाती है ।

जून के माह में बुवाई करने से उपज अधिक होती है ।


मक्का की बुवाई की विधि


मक्का की फसल दाने के लिये उगाने के उद्देश्य से पंक्तियों में बुवाई करनी चाहिये ।


ऐसा करने से खड़ी फसल में बहुत - सी कृषण क्रियायें सरलापूर्वक की जा सकती हैं, जिससे उपज में वृद्धि होती है ।

चारे की प्राप्ति के लिये उगाई गई मक्का की छिटकवाँ विधि से बुवाई की जा सकती है ।


मक्का बोने की मशीन


मक्का की फसल में एक पंक्ति से दूसरी पंक्ति की दूरी 45 से 60 सेमी. रखी जाती है जबकि पौधे से पौधे की दूरी 20 सेमी० पर्याप्त होती है ।


इस कार्य हेतु मेज प्लान्टर यन्त्र (Maize planter machine) का प्रयोग करना चाहिये ।


मक्का में पौधों की संख्या कितनी होनी चाहिए?


मक्का की फसल की बुवाई उपरोक्त बताये गये अन्तरण पर करने से एक हेक्टेयर खेत में लगभग 75000 पौधे उगते हैं ।


मक्का की बुवाई की गहराई कितनी होनी चाहिए?


मक्का का बीज लगभग 5 सेमी. गहराई पर बोना चाहिये ।

बीज को अधिक गहराई पर बोने से अंकुरण में देरी होती है जिससे प्रति इकाई क्षेत्रफल में पौधों की संख्या कम हो जाती है ।


मक्का की बीज दर कितनी होती है?


मक्का की देशी जातियों का बीज 15-16 किग्रा. प्रति हैक्टेयर प्रयोग किया जाना चाहिये जबकि संकर व संकल जातियों का बीज 20-25 किग्रा. प्रति हैक्टेयर पर्याप्त रहता है ।


मक्का का कोन प्रयोग का प्रयोग करना चाहिए?


मक्का की बुवाई के लिये प्रयोग किया गया बीज शुद्ध व प्रमाणित होना चाहिये ।


संकर मक्का का बीज प्रतिवर्ष नया खरीदना चाहिये और यह प्रमाणित भी होना आवश्यक है जबकि संकुल जातियों के प्रमाणित बीज से उगाई गई फसल के बीज को 3-4 वर्षों तक प्रयोग किया जा सकता है ।


मक्का में बीजोपचार


थायराम 1% पारायुक्त रसायन 2.5 ग्राम प्रति किग्रा. बीज की दर से प्रयोग में लाना चाहिये ।


मक्का में खाद एवं उर्वरक की मात्रा


मक्का की संकर व संकुल जातियों के लिये 120 किग्रा० नाइट्रोजन, 60 किग्रा. फास्फोरस व 30 किग्रा. पोटाश प्रति हैक्टेयर की आवश्यकता होती है ।

इसकी पूर्ति के लिये 190 किग्रा. NPK 12:32:16 एवं 210 किग्रा० यूरिया का प्रयोग किया जा सकता है ।


मक्का में कोन सा खाद डालना चाहिए?


सम्पूर्ण NPK बुवाई से पहले कुण्डों में तथा यूरिया को दो बार में खड़ी फसल में प्रयोग करना चाहिये, परन्तु मक्का की देशी जातियों के लिये उपरोक्त मात्रा का आधा कर देना चाहिये ।


मक्का में खाद की मात्रा


( i ) पौधा लगते समय N:P:K = 20:40:20

( ii ) पौधा लगाने के दो सप्ताह बाद N:P:K = 20:0:0

( ii ) घुटने तक ऊँचाई के पौधे होने पर N:P:K = 30:0:0

( iv ) फूलों के निकलने के समय N:P:K = 30:0:0

नोट : - NPK की यह मात्रा एक हैक्टेयर खेत के लिये कि० ग्रा० में दी गई है । 


मक्का की फसल के लिये सड़ी हुई गोबर की खाद 40-50 कुन्तल/ हैक्टेयर बुवाई से पूर्व प्रयोग करनी चाहिये ।

कभी - कभी हल्की भूमियों में जिंक की कमी के लक्षण दिखाई पड़ते है ।


इसके लिये 10-20 किग्रा० जिंक सल्फेट प्रति हैक्टेयर खेत में बुवाई के समय प्रयोग करना आवश्यक है ।


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मक्का में अपनाए जाने वाले फसल चक्र उदाहरण सहित बताएं?


मक्का की खेती (makka ki kheti) में साधारणतः गेहूँ , आलू , सरसो व गन्ने के साथ विभिन्न फसल चक्रों में उगाई जाती है ।


मक्का एक खरीफ ऋतु की फसल है ।

खरीफ ऋतु में उगने के बाद जौं, चना, बरसीम, जई आदि फसलें रबी के मौसम में उगाई जाती हैं ।


मक्का की फसल के प्रमुख फसल चक्र निम्न प्रकार हैं -


( i ) मक्का - गेहूँ ( एकवर्षीय )


( ii ) मक्का - आलू - गेहूँ ( एकवर्षीय )


( iii ) मक्का - तोड़िया - गेहूँ ( एकवर्षीय )


( iv ) मक्का - आलू - गेहूँ - मूंग ( एकवर्षीय )


( v ) मक्का - तोड़िया - गेहूँ - मूंग ( एकवर्षीय )


( vi ) मक्का - गेहूँ, गन्ना ( द्विवर्षीय )


( vii ) मक्का - गेहूँ, ज्वार - गन्ना ( तीन वर्षीय )


मक्का की मिलवां खेती किन - किन फसलों के साथ की जाती है?


मक्का को सोयाबीन, मूंग, उड़द, लोबिया व मूंगफली आदि के साथ मिलाकर भी बोया जाता है ।


उदाहरण के लिए -


( i ) मक्का + लोबिया - जई + बरसीम


( ii ) ज्वार + लोबिया - जई + बरसीम मक्का + लोबिया


( iii ) ज्वार - बरसीम, मक्का + लोबिया


( iv ) दीनानाथ घास बरसीम, मक्का + लोबिया


( v ) नेपियर घास + बरसीम, मक्का + लोबिया


मक्का की खेती के लिए आवश्यक सिंचाई एवं जल निकास


मक्का की फसल (makka ki fasal) के लिये कम व अधिक पानी दोनों ही हानिकारक होते हैं ।

मक्का के पौधे मुरझाने नहीं चाहिये ।


मक्का के पौधों में फूल व बाल निकलते समय खेत में नमी बनाये रखना अति आवश्यक है ।

इस फसल के लिये खेत में उत्तम जल निकास की व्यवस्था होनी आवश्यक है ।


मक्का की क्रांतिक अवस्थाएं -


1. वानस्पतिक वृद्धि अवस्था (Vegetative growth stage) = 20-40 DAS

2. नर मंजरी व रेशमी अवस्था (Tasselling & Silking stage  = 45-60 DAS


मक्का की जलमांग कितनी होती है?


मक्का की फसल के लिए 450मिमी० जल की आवश्यकता होती है ।


मक्का में निराई - गुड़ाई व खरपतवार नियन्त्रण


मक्का का पौधा प्रारम्भिक अवस्था में ही खरपतवारों से दब जाता है ।

अतः पौधों के उगने के समय से हो खेत में 2-3 निराइयाँ खुरपी की सहायता से की जाती है ।


प्रभावशाली खरपतवार नियन्त्रण के लिये -


800-1000 लीटर पानी में सीमाजीन या एट्राजीन 1.5 किग्रा. प्रति हैक्टेयर की दर से खरपतवारों के अंकुरण से पूर्व प्रयोग करना चाहिये ।


मक्का की चारे की फसल में खरपतवारों के नियन्त्रण की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि पौधों की संख्या अधिक होने से खरपतवारों को पौधों द्वारा दवा लिया जाता है ।


मक्का की फसल का स्वास्थ्य


मक्का की अच्छी फसल के लिये पौधों का उत्तम स्वास्थ्य होना आवश्यक है ।

इस फसल को विभिन्न प्रकार के कीट जैसे – तना मक्खी, एफिड व तना छेदक हानि पहुँचाते रहते हैं ।


अतः इन कीटों का समय रहते नियन्त्रण आवश्यक है ।

मक्का की फसल में लगने वाली प्रमुख बीमारियों में पर्ण अंगमारी, बीज विलगन, चारकोल विलगन, मोजेक व फफूंदी रोग प्रमुख हैं ।


फफूंद रोग पर नियन्त्रण हेतु - जिनेब 2.5 किग्रा. रसायन 1000 लीटर पानी में घोलकर एक हैक्टेयर खेत में पर्याप्त रहता है ।


मक्का की फसल कितने दिन में तैयार होती है?


1. मक्का की देसी किस्में में 80 से 90 दिन में पक कर तैयार हो जाती है ।

2. मक्का की संकुल किस्में में 90 से 110 दिन में पक कर तैयार हो जाती है ।


मक्का की फसल से प्राप्त उप


मक्का की देशी जातियों से 10-15 कुन्तल दाना प्रति हैक्टेयर प्राप्त होता है ।

देशी जातियों की तुलना में संकर व संकुल जातियों की उपज अधिक है ।


भारत में प्रति एकड़ उपज : मक्का


एक हैक्टेयर खेत से संकर जातियों की उपज लगभग 40 कुन्तल तक प्राप्त होती है, जबकि संकुल जातियाँ 40-50 कुन्तल प्रति हैक्टेयर तक उपज देती हैं ।


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